Thursday, October 27, 2011

Shiv Bhajan 2 - भोले भंडारी सबके ही भण्डार भरें

शिव हैं दयालु, शिव हैं दाता, 
शिव पालक हैं इस सृष्टि के 

भोले भंडारी सबके ही भण्डार भरें 
जो पूजे उनको उनका वो उद्धार करें 

जय जय विश्वनाथ शम्भू, जय जय नीलकंठ शम्भू 
जय जय चन्द्रभाल शम्भू, जय जय महाकाल शम्भू
१) मायापति की माया का अंत होता ही नहीं 
    उनके द्वारे किसी बात की कमी नहीं 
    बस भावना के उनको दो फूल अर्पण कीजिये 
    देवों के देव से फिर चाहे जो भी लीजिये 
    कोई तीनों लोक में ऐसा और दाता ना
    जिनके शिवाले से तो खाली कोई जाता ना 
  भक्तों के होSSS 
    सब भक्तों के सपने वो साकार करें 
    जो पूजे उनको उनका वो उद्धार करें 

२) शिव चरणों मं अपने ये सर झुका के देखिये
    काया पलट देंगे शिव आजमा के देखिये 
    महादेव डमरू वाले की लीला ही महान है
    बड़े बड़े महादानी लेने आते दान हैं 
    भस्मी रमाये बैठे वो तो कैलाश पे
    वो ही छुपे भक्तों के मन के विश्वास में
   ना जाने हो SSS
    ना जाने वो कब किसपे उपकार करें
    जो पूजे उनको उनका वो उद्धार करें 

Monday, September 26, 2011

Krishna Bhajan 1 - अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो


देखो देखो ये गरीबी,ये गरीबी का हाल,
कृष्ण के दर पे बिस्वास लेके आया हूँ,
मेरे बचपन का यार है मेरा श्याम,
यही सोच कर मैं आस कर के आया हूँ.

अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो
के दर पे सुदामा गरीब आगया है
भटकते भटकते ना जाने कहाँ से,
तुम्हारे महल के करीब आगया है

१) ना सर पे है पगड़ी ना तन पे है जामा,
बता दो कन्हैया को नाम है सुदामा (३)
बस इक बार मोहन से जा कर के कहे दो
के मिलने सखा बदनसीब आ गया है

अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो,
के दर पे सुदामा गरीब आगया है

२) सुनते ही दौड़े चले आये मोहन
लगाया गले से सुदामा को मोहन (३)
हुआ रुक्मिणी को बहुत ही अचंभा
ये मेहमान कैसा अजीब आ गया है

अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो,
के दर पे सुदामा गरीब आगया है

३) बराबर में अपने सुदामा बैठाये,
चरण आंसुओं से श्याम ने धुलाये (३)
ना घबराओ प्यारे ज़रा तुम सुदामा
ख़ुशी का समा तेरे करीब आ गया है

अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो,
के दर पे सुदामा गरीब आगया है

Monday, September 19, 2011

Hanuman Bhajan 2 - म्हारो बेड़ो पार लगाए दीजो

म्हारो बेड़ो पार लगाए दीजो सालासर महाराज 
सालासर महाराज म्हारा मेहंदीपुर महाराज 
भटके ने (३) राह दिखाए दीजो, सालासर महाराज
म्हारो---

१) म्हारी लाज राखो थे अब की, म्हारी नाव भंवर में अटकी 
     अटकी ने (३) पार लगाए दीजो, सालासर महाराज 
     म्हारो---

२) है एक आसरो थारो, नहीं और कोई है म्हारो 
     विपदा में (३) साथ निभाये दीजो, सालासर महाराज
     म्हारो---

३) प्रभु इतना नहीं विचारो, गलती ने मेरी सुधारो
     बीती बातां (३) ने भुलाए दीजो, सालासर महाराज 
     म्हारो---

४) घर घर में चर्चा थारी, थे दीन दुखी हितकारी 
     इस बालक (३) ने अपनाए लीजो, सालासर महाराज 
     म्हारो---

Saturday, September 17, 2011

Hanuman Bhajan 1 - मेरे बाबा मैं तेरे सहारे से

मेरे बाबा मैं तेरे सहारे से, मेरी बिगड़ी बना दो इशारे से 

१) सहारा तुम्हारा मुझे एक प्रभुजी 
      मेरी नैया लगा दो किनारे से 

२) मेरी नैया का कोई खेवैया नहीं
      कोई जाकर को घाटे वाले से 

३) मेरी झोली तो भर दो दया कर के 
      मैं खाली न जाऊं तेरे द्वारे से 

४) बाबा तेरे सिवा मेरा कोई नहीं 
      कोई सुनता नहीं है पुकारे से 

५) बाबा अर्जी लगाईं मैंने आकर के 
      अब संकट तो काटो दया कर के 

Friday, September 16, 2011

Gurudev Bhajan 2 - थोडा ध्यान लगा

थोडा ध्यान लगा, थोडा ध्यान लगा 
गुरुवर दौड़े दौड़े आयेंगे, थोडा ध्यान लगा 
थोडा ध्यान लगा, गुरुवर दौड़े दौड़े आयेंगे
तुझे गले से लगायेंगे 

अखियाँ मन की खोल, अखियाँ मन की खोल
तुझको दर्शन वो कराएँगे, अखियाँ मन की खोल
अखियाँ मन की खोल, तुझको दर्शन वो कराएँगे
तुझे गले से लगायेंगे

१) हैं राम रमैया वो, हैं कृष्ण कन्हैया वो 
     वही मेरा ईश है 
     सत्कर्म राहों पर, चलना सिखाते जो 
     वही जगदीश है   हो ssss
     प्रेम से पुकार,  प्रेम से पुकार
     तेरे पाप वो जलाएंगे,  प्रेम से पुकार
      प्रेम से पुकार,  तेरे पाप वो जलाएंगे
     तुझे गले से लगायेंगे

२) किरपा की छाया में, बैठाएंगे तुझको 
     कहाँ तुम जाओगे 
    उनकी दया दृष्टि, जब जब पड़ेगी तुम 
    ये भव तर जाओगे    हो ssss
    ऐसा है विश्वास, ऐसा है विश्वास
    मन में ज्योत वो जगायेंगे, ऐसा है विश्वास
    ऐसा है विश्वास, मन में ज्योत वो जगायेंगे
    तुझे गले से लगायेंगे

३) मुनियों ने ऋषियों ने, गुरु शिष्य महिमा का 
    किया गुणगान है 
    गुरुवर के चरणों में, झुकती सकल सृष्टि 
    झुके भगवान् हैं    हो ssss
    महिमा है अपार, महिमा है अपार 
    सत की राह वो दिखायेंगे, महिमा है अपार
    महिमा है अपार, सत की राह वो दिखायेंगे
    तुझे गले से लगायेंगे 

Ram Bhajan 1 - श्री रामचंद्र कृपालु भजमन

श्री रामचंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणं 
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं 

कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरम 
पट पीत मानहु तड़ित रूचि शुचि नौमि जनक सुतावरं 

भजु दीनबंधू दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं 
रघुनंद आनंद कंद कोसल चन्द्र दशरथ नन्दनं 

सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदार अंग विभूशनम
आजानु भुजषर चाप धर संग्राम जित खर दूषणं 

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं 
मम ह्रदय कंज निवास कुरु कामादि खल दल गंजनं 

मनु जाहि राचेउ मिलही सो वर सहज सुन्दर सांवरो
करुना निधान सुजान सीलु सनेहू जानत रावरो 

एही भाँती गौरी असीस सुनि सिय सहित हिय हर्षित अलि
तुलसी भवानी पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चलि


Thursday, September 15, 2011

Aarti 7 - श्री अम्बे माता जी की आरती

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुम को निस दिन ध्यावत
मैयाजी को निस दिन ध्यावत
हरि ब्रह्मा शिवजी .
बोलो जय अम्बे गौरी ..

माँग सिन्दूर विराजत टीको मृग मद को
मैया टीको मृगमद को
उज्ज्वल से दो नैना चन्द्रवदन नीको
बोलो जय अम्बे गौरी ..

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर साजे
मैया रक्ताम्बर साजे
रक्त पुष्प गल माला कण्ठन पर साजे
बोलो जय अम्बे गौरी ..

केहरि वाहन राजत खड्ग खपर धारी
मैया खड्ग खपर धारी
सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुख हारी
बोलो जय अम्बे गौरी ..

कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती
मैया नासाग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर सम राजत ज्योति
बोलो जय अम्बे गौरी ..

शम्भु निशम्भु बिडारे महिषासुर घाती
मैया महिषासुर घाती
धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती
बोलो जय अम्बे गौरी ..

चण्ड मुण्ड संहारी शोणित बीज हरे
मैया शोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोउ मारे सुर भयहीन करे
बोलो जय अम्बे गौरी ..

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी
मैया तुम कमला रानी
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी
बोलो जय अम्बे गौरी ..

चौंसठ योगिनि गावत नृत्य करत भैरों
मैया नृत्य करत भैरों
बाजत ताल मृदंगा और बाजत डमरू
बोलो जय अम्बे गौरी ..

तुम हो जग की माता तुम ही हो भर्ता
मैया तुम ही हो भर्ता
भक्तन की दुख हर्ता सुख सम्पति कर्ता
बोलो जय अम्बे गौरी ..

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी
मैया वर मुद्रा धारी
मन वाँछित फल पावत देवता नर नारी
बोलो जय अम्बे गौरी ..

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती
मैया अगर कपूर बाती
श्री माल केतु में राजत कोटि रतन ज्योती
बोलो जय अम्बे गौरी ..

माँ अम्बे की आरती जो कोई नर गावे
मैया जो कोई नर गावे
कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे
बोलो जय अम्बे गौरी ..

Aarti 6 - श्री कृष्ण जी की आरती

आरती कुँज बिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ..

गले में वैजन्ती माला, माला
बजावे मुरली मधुर बाला, बाला
श्रवण में कुण्डल झलकाला, झलकाला
   नन्द के नन्द,  श्री आनन्द कन्द,  मोहन बॄज चन्द
   राधिका रमण बिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ..

गगन सम अंग कान्ति काली, काली
राधिका चमक रही आली, आली
लसन में ठाड़े वनमाली, वनमाली
   भ्रमर सों अलक, कस्तूरी तिलक, चन्द्र सी झलक
   ललित छवि श्यामा प्यारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ..

जहाँ से प्रगट भई गंगा, गंगा
कलुष कलि हारिणि श्री गंगा, गंगा
स्मरण से होत मोह भंगा, भंगा
   बसी शिव शीश, जटा के बीच, हरे अघ कीच
   चरण छवि श्री बनवारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ..

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, बिलसै
देवता दरसन को तरसै, तरसै
गगन सों सुमन राशि बरसै, बरसै
   बजे मुरचन    मधुर मृदंग    ग्वालिनी संग
   अतुल रति गोप कुमारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ..

चमकती उज्ज्वल तट रेणु, रेणु
बज रही बृन्दावन वेणु, वेणु
चहुँ दिसि गोपि काल धेनु, धेनु
   कसक मृद मंग,    चाँदनी चन्द,    कटत भव भन्ज
   टेर सुन दीन भिखारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ..

Aarti 5 - श्री शिव शंकर जी की आरती

ॐ जय शिव ॐकारा, स्वामी हर शिव ॐकारा .
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्धांगी धारा ..
जय शिव ॐकारा ..

एकानन चतुरानन पंचानन राजे
स्वामी पंचानन राजे .
हंसासन गरुड़ासन वृष वाहन साजे ..
जय शिव ॐकारा ..

दो भुज चारु चतुर्भुज दस भुज ते सोहे
स्वामी दस भुज ते सोहे .
तीनों रूप निरखता,  त्रिभुवन जन मोहे ..
जय शिव ॐकारा ..

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी
स्वामी मुण्डमाला धारी .
चंदन मृग मद सोहे भाले शशि धारी ..
जय शिव ॐकारा ..

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघाम्बर अंगे
स्वामी बाघाम्बर अंगे .
सनकादिक ब्रह्मादिक भूतादिक संगे ..
जय शिव ॐकारा ..

कर में श्रेष्ठ कमण्डलु चक्र त्रिशूल धरता
स्वामी चक्र त्रिशूल धरता .
जगकर्ता जगहर्ता जग पालन कर्ता ..
जय शिव ॐकारा ..

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका
स्वामी जानत अविवेका .
प्रणवाक्षर में शोभित यह तीनों एका .
जय शिव ॐकारा ..

निर्गुण शिव की आरती जो कोई नर गावे
स्वामी जो कोई नर गावे .
कहत शिवानंद स्वामी मन वाँछित फल पावे .
जय शिव ॐकारा ..

Aarti 4 - श्री लक्ष्मी माता की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुम को निस दिन सेवत, मैयाजी को निस दिन सेवत
हर विष्णु विधाता .
ॐ जय लक्ष्मी माता ..

उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता
ओ मैया तुम ही जग माता .
सूर्य चन्द्रमा  ध्यावत, नारद ऋषि गाता
ॐ जय लक्ष्मी माता ..

दुर्गा रूप निरंजनी , सुख सम्पति दाता
ओ मैया सुख सम्पति दाता .
जो कोई तुम को ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता ..

तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभ दाता
ओ मैया तुम ही शुभ दाता .
कर्म प्रभाव प्रकाशिनी , भव निधि की दाता
ॐ जय लक्ष्मी माता ..

जिस घर तुम रहती तहँ सब सद्गुण आता
ओ मैया सब सद्गुण आता .
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता
ॐ जय लक्ष्मी माता ..

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता
ओ मैया वस्त्र न कोई पाता .
खान पान का वैभव, सब तुम से आता
ॐ जय लक्ष्मी माता ..

शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता
ओ मैया क्षीरोदधि जाता .
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता
ॐ जय लक्ष्मी माता ..

महा लक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता
ओ मैया जो कोई जन गाता .
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता
ॐ जय लक्ष्मी माता ..

Sunday, September 4, 2011

Aarti 3 - श्री हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की .
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ..

जाके बल से गिरिवर काँपे
रोग दोष जाके निकट न झाँके .
अंजनि पुत्र महा बलदायी
संतन के प्रभु सदा सहायी ..
आरती कीजै हनुमान लला की .

दे बीड़ा रघुनाथ पठाये
लंका जाय सिया सुधि लाये .
लंका सौ कोटि समुद्र सी खाई
जात पवनसुत बार न लाई ..
आरती कीजै हनुमान लला की .

लंका जारि असुर संघारे
सिया रामजी के काज संवारे .
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे
आन संजीवन प्राण उबारे ..
आरती कीजै हनुमान लला की .

पैठि पाताल तोड़ि यम कारे
अहिरावन की भुजा उखारे .
बाँये भुजा असुरदल मारे
दाहिने भुजा संत जन तारे ..
आरती कीजै हनुमान लला की .

सुर नर मुनि आरति उतारे
जय जय जय हनुमान उचारे .
कंचन थार कपूर लौ छाई
आरती करत अंजना माई ..
आरती कीजै हनुमान लला की .

जो हनुमान जी की आरती गावे
बसि वैकुण्ठ परम पद पावे . 
लंका विध्वंस किये रघुराई  
तुलसीदास जाकी कीर्ति गायी
आरती कीजै हनुमान लला की .
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ..

Shiv Bhajan 1 - शिव शंकर को जिसने पूजा

शिव शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्वार हुआ - 2
अन्त काल को भवसागर में उसका बेड़ा पार हुआ
भोले शंकर की पूजा करो
ध्यान चरणों में उसके धरो -2
हर हर महादेव शिव शम्भू...................


डमरु वाला है जग में दयालु बड़ा
दीनदुखियों का दाता जगत का पिता - 2
सब पे करता है ये भोला शंकर दया
सब को देता है ये आसरा
इन पावन चरणों में अर्पण आकर जो एक बार हुआ
अन्त काल को भवसागर में उसका बेड़ा पार हुआ
ओम नमो शिवाय नमो
हर हर महादेव शिव शम्भू............


नाम ऊँचा है सबसे महादेव का
वन्दना इसकी करते है सब देवता
इसकी पूजा से वरदान पाते है सब
शक्ति का दान पाते है सब
नाग असुर प्राणी सब पर ही भोले का उपकार हुआ
अन्त काल में भवसागर में उसका बेड़ा पार हुआ

शिव शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्वार हुआ - 2
अन्त काल को भवसागर में उसका बेड़ा पार हुआ
भोले शंकर की पूजा करो
ध्यान चरणों में उसके धरो -2
हर हर महादेव शिव शम्भू...................

Aarti 2 - ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे .
    भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे ..
 
जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का .
सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का ..
 
    मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी .
    तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी ..
 
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतरयामी .
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी ..
 
    तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता .
    मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता ..
 
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति .
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति ..
 
    दीनबंधु दुखहर्ता, तुम रक्षक मेरे .
    करुणा हस्त बढ़ाओ, द्वार पड़ा तेरे ..
 
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा .
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा ..



    तन मन धन सब है तेरा, स्वामी सबकुछ है तेरा
     तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा...

Aarti 1 - श्री गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा .
   माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ..

एक दन्त दयावन्त चार भुजाधारी
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी .
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा ..

   अंधे को आँख देत कोढ़िन को काया
   बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया .
 
  ' सूर' श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा 
    माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ..

   जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ..
 
        माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ..